Sunday, October 5, 2008

ख़ुद दिशाएं खोजिए

जिंदगी में बस विजय की लालसाएं खोजिये;
हार में भी जीत की संभावनाएं खोजिए

भावनाओं के दिए में तेल शुतिता का भरें;
चेतना की लौ लगन की वर्तिकाएँ खोजिये

आसरा कोई उधारी के उजालों का नहीं;
ख़ुद बनो दीपक स्वयं के ख़ुद दिशाएं खोजिये

अब अँधेरी रात बस दो चार पल की बात है;
खोलिए खिड़की सुबह की लालिमायें खोजिये

चन्द्रभान भारद्वाज

1 comment:

अनुपम अग्रवाल said...

अब अँधेरी रात बस दो चार पल की बात है;
खोलिए खिड़की सुबह की लालिमायें खोजिये
ज़िंदगी के लिए आनंददायक ,प्रेरणादायक
इन लाइनों में ज़िंदगी की गूँज है