Sunday, April 7, 2019
Thursday, March 28, 2019
दामन बचा बचा के
कर दी खड़ी कँटीली बागड़ उगा उगा के
अब राह अपनी चलना दामन बचा बचा के
जो नोट दिख रहे थे कल तक नए चलन में
रक्खे तिजौरियों में अब सब छुपा छुपा के
घेरे हुई थी थाना जो न्याय माँगने को
उस भीड़ को पुलिस ने मारा भगा भगा के
जो सिर्फ चापलूसी के दम पे जी रहे थे
रोगी हुए कमर के उसको झुका झुका के
मंचों पे बैठ के तो उपवास करते रहते
खाते हैं पर गुलगुले नजरें बचा बचा के
ऐलान कर रहे हैं फिर से धमाल करने
पत्ता बनारसी अब मुँह में चबा चबा के
मंचों के सामने जो ये भीड़ दिख रही है
एकत्र की गई है बंदर नचा नचा के
सींवन कहीं उधड़ती या चैन टूटती है
भरते हैं बैग में जब चीजें दबा दबा के
बचता है वक्त अपना बचती है शक्ति अपनी
जब 'भारद्वाज ' रखते हैं घर जमा जमा के
चंद्रभान भारद्वाज
कर दी खड़ी कँटीली बागड़ उगा उगा के
अब राह अपनी चलना दामन बचा बचा के
जो नोट दिख रहे थे कल तक नए चलन में
रक्खे तिजौरियों में अब सब छुपा छुपा के
घेरे हुई थी थाना जो न्याय माँगने को
उस भीड़ को पुलिस ने मारा भगा भगा के
जो सिर्फ चापलूसी के दम पे जी रहे थे
रोगी हुए कमर के उसको झुका झुका के
मंचों पे बैठ के तो उपवास करते रहते
खाते हैं पर गुलगुले नजरें बचा बचा के
ऐलान कर रहे हैं फिर से धमाल करने
पत्ता बनारसी अब मुँह में चबा चबा के
मंचों के सामने जो ये भीड़ दिख रही है
एकत्र की गई है बंदर नचा नचा के
सींवन कहीं उधड़ती या चैन टूटती है
भरते हैं बैग में जब चीजें दबा दबा के
बचता है वक्त अपना बचती है शक्ति अपनी
जब 'भारद्वाज ' रखते हैं घर जमा जमा के
चंद्रभान भारद्वाज
Saturday, March 23, 2019
नाज है तो है
हमारे प्यार पर हमको अगर कुछ नाज है तो है
हमारी भी निगाहों में कहीं मुमताज है तो है
दिया बनकर जले दिन-रात उसकी मूर्ति के आगे
ये अपने सूफियाना प्यार का अंदाज है तो है
जमाने के लिए राजा रहे हम अपनी मर्जी के
हमारे दिल पे पर इक नाजनी का राज है तो है
उमर इक खूबसूरत मोड़ पर दिल छोड़ आई थी
धड़कनों में उसी की गूँजती आवाज है तो है
हमारा प्यार उठती हाट का सौदा नहीं कोई
बँधे अनुबंध में दुनिया भले नाराज है तो है
खुली है ज़िंदगी अपनी कहीं पर्दा नहीं कोई
अँगूठी में जड़ा उसका दिया पुखराज है तो है
हमारे प्यार का आधार बालू का घरोंदा था
हमारी आँख में वह आज तक भी ताज है तो है
फुदकती ही रही हरदम हमारे प्यार की बुलबुल
जमाने का हरिक सैय्याद तीरंदाज है तो है
अभी तक पढ़ रहे हैं बस रदीफ़ों काफियों को हम
ग़ज़ल में पर हमारा नाम 'भरद्वाज़ है तो है
चंद्रभान भारद्वाज
Wednesday, March 20, 2019
सफर अपना सुहाना हो गया
वक्र ग्रह सीधे हुए विनयी ज़माना हो गया
उसके मिलने से सफर अपना सुहाना हो गया
चाँद सूरज और तारे संग अपने हो गए
जबसे अपने संग उसका आना जाना हो गया
जब अचानक हो गई उसकी नजर मेरी तरफ
तब से मैं दुनिया की नज़रों का निशाना हो गया
जन्म से थे यार हम तो आदी तपती धूप के
अपने सिर पर हाथ उसका शामियाना हो गया
शब्द-चित्रों में सँजोए उसकी यादों के प्रहर
लगता अपने नाम कारूँ का खजाना हो गया
भर उड़ानें पार कर दीं हमने जलती सरहदें
अपने ऊँचे हौसलों का आजमाना हो गया
तेज गति से वक्त 'भारद्वाज ' सरपट भग रहा
अपना पोता अपने से ज्यादा सयाना हो गया
चंद्रभान भारद्वाज
Thursday, March 7, 2019
हंसों के मन में बेईमानी
घर कर गई है हंसों के मन में बेईमानी
करते नहीं अलग अब वे दूध और पानी
डाली जड़ों में जब से कुछ खाद यूरिया की
फूली तो है बहुत पर महके न रातरानी
कुछ डाल के वो पत्ते जो डाल से जुड़े हैं
आँधी की कोई धमकी उनने कभी न मानी
वैसे तो सब रियासत पहले ही मिट गई थीं
पैदा हुए नए अब कुछ राजा और रानी
बस जोड़ तोड़ का है अब खेल यह सियासत
गठबंधनों का अड्डा है आज राजधानी
जब बोझ हद से ज्यादा गाड़ी पे लद रहा हो
तो चाल होती धीमी या टूटती कमानी
हैं 'भारद्वाज ' ऐसे भी हीरे कुछ ग़ज़ल में
कल था न जिनका सानी अब भी न उनका सानी
चंद्रभान भारद्वाज
Friday, February 8, 2019
रास्ते अपने अलग हैं
रास्ते अपने अलग हैं इस जमाने के अलग
पार जाने के अलग हैं डूब जाने के अलग
अपनी अपनी ढपलियाँ हैं अपनी अपनी रागिनी
व्याख्याएं तो अलग हैं शब्द गाने के अलग
साज़ सबके और साजिंदे भी सब के एक से
राग के आलाप लेकिन हर घराने के अलग
हैं अलग खुद के लिए तो सत्यनिष्ठा के नियम
पर नियम औरों की निष्ठा आजमाने के अलग
मेल खाता ही नहीं है व्यक्ति से व्यक्तित्व का
दाँत खाने के अलग हैं पर दिखाने के अलग
खेत में गाड़े हुए हैं जो बिजूके बाँस के
भय दिखाने के अलग हैं खग उड़ाने के अलग
देह के स्पर्श सब पहचानती हैं लड़कियाँ
छेड़खानी के अलग हैं गुदगुदाने के अलग
लोभ में दानों के चिड़ियाँ फँस गईं हैं जाल में
गूँजते स्वर उनके डर से चहचहाने के अलग
प्यार भारद्वाज मसला है नहीं कानून का
दिल बने हैं प्यार का रिश्ता निभाने के अलग
चंद्रभान भारद्वाज
Friday, January 11, 2019
सुगम रस्ता नहीं मिलता
कभी मतला नहीं मिलता कभी मकता नहीं मिलता
ग़ज़लगोई में कोई भी सुगम रस्ता नहीं मिलता
खपाता जो उमर अपनी ग़ज़ल कहने में सुनने में
उसे इक मान का तमगा कि गुलदस्ता नहीं मिलता
कभी मरने पे उसकी शायरी की क़द्र होती है
जिसे जीवन में महफ़िल या कोई श्रोता नहीं मिलता
जहाँ परिवार में मिलती है शिक्षा संस्कारों की
किसी बच्चे के कंधे पर कोई बस्ता नहीं मिलता
मिलेगी गाँव में मक्के की रोटी साग सरसों का
वहाँ पीज़ा नहीं बर्गर नहीं पाश्ता नहीं मिलता
यहाँ खुद आदमी का खून तो मिलता है सस्ते में
मगर सामान उसकी भूख का सस्ता नहीं मिलता
सदा उत्पात कर देता खड़ा शैतान बस्ती में
अगर बाजार से उसको नियत हफ्ता नहीं मिलता
ठहाके मारकर हैवान तो फिरता है सडकों पर
किसी इंसान का चेहरा मगर हँसता नहीं मिलता
किसी को तो नज़र मिलते ही 'भारद्वाज 'मिल जाता
किसी को ज़िंदगी भर प्यार का रिश्ता नहीं मिलता
चंद्रभान भारद्वाज
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