Saturday, May 25, 2019

           हल करते करते

उलझती गई और हल करते करते
ये जीवन की गुत्थी सरल करते करते

लगा श्वेत आँचल पे धब्बा जो काला
गया फ़ैल ज्यादा धवल करते करते

सँजोये थे जीवन में सपने सलोने
अधूरे रहे हैं वो कल करते करते

अगर ठान रक्खी है हठधर्मिता तो
बढ़ेगी शमन की पहल करते करते

स्वयं की कला की चमक खो चुके हैं
विदेशी की भोंड़ी नक़ल करते करते

गई दृष्टि कल ज्योति भी अब गँवाई
 विरह में ये आँखें सजल करते करते

फँसा आदमी चक्रव्यूहों में अक्सर
'भरदवाज' सच पर अमल करते करते

चंद्रभान भारद्वाज
 


Sunday, April 7, 2019

                दूसरों की बात लिख

आप-बीती छोड़ कर कुछ दूसरों की बात लिख
सो रहे फुटपाथ पर उन बेघरों की बात लिख

अब तलक लिखते रहे हो राजमहलों की कथा
निर्धनों की झोंपडी की छप्परों की बात लिख

घोषणा ही घोषणाएं हो रहीं हर मंच से
मिल नहीं पाए कभी उन अवसरों की बात लिख

डाल कर दाने फँसाया पंछियों को जाल में
अब कतर डाले सभी के उन परों की बात लिख

छोड़ कर जनहित लगे हैं बस स्वहित को साधने
धर्म की उन मस्जिदों की मंदिरों की बात लिख

जो गहन गंभीर मुद्दों को भी हलके ले रहे 
आज के उन मसखरों उन जोकरों की बात लिख

उच्च शिखरों पर जड़े उन पर लिखा तो क्या लिखा
नींव के नीचे गड़े उन पत्थरों की बात लिख

बाँध कर मुट्ठी बनाते जो कबूतर धूल से
उन जमूरों और उन जादूगरों की बात लिख

अब तलक लिखते रहे हो बस अँधेरे पक्ष को
आज 'भरद्वाज़ उजले अक्षरों की बात लिख

चंद्रभान भारद्वाज 

Thursday, March 28, 2019

              दामन बचा बचा के

कर दी खड़ी कँटीली बागड़  उगा उगा के
अब राह अपनी चलना दामन बचा बचा के

जो नोट दिख रहे थे कल तक नए चलन में
रक्खे तिजौरियों में अब सब छुपा छुपा के

घेरे हुई थी थाना जो न्याय माँगने को
उस भीड़ को पुलिस ने मारा भगा भगा के  

जो सिर्फ चापलूसी के दम पे जी रहे थे 
रोगी हुए कमर के उसको झुका झुका के 

मंचों पे बैठ के तो उपवास करते रहते 
खाते हैं पर गुलगुले नजरें बचा बचा के 

ऐलान कर रहे हैं फिर से धमाल करने 
पत्ता बनारसी अब मुँह में चबा चबा के 

मंचों के सामने जो ये भीड़ दिख रही है 
एकत्र की गई है बंदर नचा नचा के 

सींवन कहीं उधड़ती या चैन टूटती है 
भरते हैं बैग में जब चीजें दबा दबा के

बचता है वक्त अपना बचती है शक्ति अपनी 
जब 'भारद्वाज ' रखते हैं घर जमा जमा के 

चंद्रभान भारद्वाज 









Saturday, March 23, 2019

                     नाज है तो है

हमारे प्यार पर हमको अगर कुछ नाज है तो है
हमारी भी निगाहों में कहीं मुमताज है तो है

दिया बनकर जले दिन-रात उसकी मूर्ति के आगे
ये अपने सूफियाना प्यार का अंदाज है तो है

जमाने के लिए राजा रहे हम अपनी मर्जी के
हमारे दिल पे पर इक नाजनी का राज है तो है

उमर इक खूबसूरत मोड़ पर दिल छोड़ आई थी
धड़कनों में उसी की गूँजती आवाज है तो है

हमारा प्यार उठती हाट का सौदा नहीं कोई
बँधे अनुबंध में दुनिया भले नाराज है तो है

खुली है ज़िंदगी अपनी कहीं पर्दा नहीं कोई
अँगूठी में जड़ा उसका दिया पुखराज है तो है

हमारे प्यार का आधार बालू का घरोंदा था
हमारी आँख में वह आज तक भी ताज है तो है

फुदकती ही रही हरदम हमारे प्यार की बुलबुल
जमाने का हरिक सैय्याद तीरंदाज है तो है

अभी तक पढ़ रहे हैं बस रदीफ़ों काफियों को हम
ग़ज़ल में पर हमारा नाम 'भरद्वाज़ है तो है

चंद्रभान भारद्वाज 

Wednesday, March 20, 2019

     

        सफर अपना सुहाना हो गया 


वक्र ग्रह सीधे हुए विनयी ज़माना हो गया 
उसके मिलने से सफर अपना सुहाना हो गया


चाँद सूरज और तारे संग अपने हो गए 

जबसे अपने संग उसका आना जाना हो गया 



जब अचानक हो गई उसकी नजर मेरी तरफ 

तब से मैं दुनिया की नज़रों का निशाना हो गया 



जन्म से थे यार हम तो आदी तपती धूप के 

अपने सिर पर हाथ उसका शामियाना हो गया 



शब्द-चित्रों में सँजोए उसकी यादों के प्रहर 

लगता अपने नाम कारूँ का खजाना हो गया 



भर उड़ानें पार कर दीं हमने जलती सरहदें 

अपने ऊँचे हौसलों का आजमाना हो गया 



तेज गति से वक्त 'भारद्वाज ' सरपट भग रहा  

अपना पोता अपने से ज्यादा सयाना हो गया 



चंद्रभान भारद्वाज 



Thursday, March 7, 2019

हंसों के मन में बेईमानी

 
घर कर गई है हंसों के मन में बेईमानी 

करते नहीं अलग अब वे दूध और पानी 


डाली जड़ों में जब से कुछ खाद यूरिया की 

फूली तो है बहुत पर महके न रातरानी 


कुछ डाल के वो पत्ते जो डाल से जुड़े हैं 

आँधी की कोई धमकी उनने कभी न मानी 


वैसे तो सब रियासत पहले ही मिट गई थीं 

पैदा हुए नए अब कुछ राजा और रानी 


बस जोड़ तोड़ का है अब खेल यह सियासत 

गठबंधनों का अड्डा है आज राजधानी 


जब बोझ हद से ज्यादा गाड़ी पे लद रहा हो 

तो चाल होती धीमी या टूटती कमानी 


हैं 'भारद्वाज ' ऐसे भी हीरे कुछ ग़ज़ल में 

कल था न जिनका सानी अब भी न उनका सानी 


चंद्रभान भारद्वाज 





Friday, February 8, 2019



    


          रास्ते अपने अलग हैं 

रास्ते अपने अलग हैं इस जमाने के अलग

पार जाने के अलग हैं डूब जाने के अलग



अपनी अपनी ढपलियाँ हैं अपनी अपनी रागिनी 

व्याख्याएं तो अलग हैं शब्द गाने के अलग 


साज़ सबके और साजिंदे भी सब के एक से 

राग के आलाप लेकिन हर घराने के अलग 




हैं अलग खुद के लिए तो सत्यनिष्ठा के नियम 

पर नियम औरों की निष्ठा आजमाने के अलग




मेल खाता ही नहीं है व्यक्ति से व्यक्तित्व का   

दाँत खाने के अलग हैं पर दिखाने के अलग 




खेत में गाड़े हुए हैं जो बिजूके बाँस के 

भय दिखाने के अलग हैं खग उड़ाने के अलग 




देह के स्पर्श सब पहचानती हैं लड़कियाँ 

छेड़खानी के अलग हैं गुदगुदाने के अलग 




लोभ में दानों के चिड़ियाँ फँस गईं  हैं जाल में 

गूँजते स्वर उनके डर से चहचहाने के अलग 





प्यार भारद्वाज मसला है नहीं कानून का 

दिल बने हैं प्यार का रिश्ता निभाने के अलग 




 चंद्रभान भारद्वाज