Monday, June 3, 2019
हवन करते करते
बुराई का पुतला दहन करते करते
जली हैं उँगलियाँ हवन करते करते
मिली हैं जमाने की आलोचनाएँ
भलाई का कोई यतन करते करते
न माया मिली है नहीं राम पाए
भटकता रहा मन भजन करते करते
पराजित नहीं सत्य को कर सकी हैं
चुकीं शक्तियाँ सब दमन करते करते
न राहें मिली हैं न मंजिल ही पाई
उमर थक गई है गमन करते करते
कमर तो झुकी हो गई टेढ़ी गर्दन
मठों मंदिरों में नमन करते करते
'भरद्वाज' लौकिक, हुआ पारलौकिक
गहन प्रेम का अध्ययन करते करते
चंद्रभान भारद्वाज
Saturday, May 25, 2019
हल करते करते
उलझती गई और हल करते करते
ये जीवन की गुत्थी सरल करते करते
लगा श्वेत आँचल पे धब्बा जो काला
गया फ़ैल ज्यादा धवल करते करते
सँजोये थे जीवन में सपने सलोने
अधूरे रहे हैं वो कल करते करते
अगर ठान रक्खी है हठधर्मिता तो
बढ़ेगी शमन की पहल करते करते
स्वयं की कला की चमक खो चुके हैं
विदेशी की भोंड़ी नक़ल करते करते
गई दृष्टि कल ज्योति भी अब गँवाई
विरह में ये आँखें सजल करते करते
फँसा आदमी चक्रव्यूहों में अक्सर
'भरदवाज' सच पर अमल करते करते
चंद्रभान भारद्वाज
Sunday, April 7, 2019
दूसरों की बात लिख
आप-बीती छोड़ कर कुछ दूसरों की बात लिख
सो रहे फुटपाथ पर उन बेघरों की बात लिख
अब तलक लिखते रहे हो राजमहलों की कथा
निर्धनों की झोंपडी की छप्परों की बात लिख
घोषणा ही घोषणाएं हो रहीं हर मंच से
मिल नहीं पाए कभी उन अवसरों की बात लिख
डाल कर दाने फँसाया पंछियों को जाल में
अब कतर डाले सभी के उन परों की बात लिख
छोड़ कर जनहित लगे हैं बस स्वहित को साधने
धर्म की उन मस्जिदों की मंदिरों की बात लिख
जो गहन गंभीर मुद्दों को भी हलके ले रहे
आज के उन मसखरों उन जोकरों की बात लिख
उच्च शिखरों पर जड़े उन पर लिखा तो क्या लिखा
नींव के नीचे गड़े उन पत्थरों की बात लिख
बाँध कर मुट्ठी बनाते जो कबूतर धूल से
उन जमूरों और उन जादूगरों की बात लिख
अब तलक लिखते रहे हो बस अँधेरे पक्ष को
आज 'भरद्वाज़ उजले अक्षरों की बात लिख
चंद्रभान भारद्वाज
Thursday, March 28, 2019
दामन बचा बचा के
कर दी खड़ी कँटीली बागड़ उगा उगा के
अब राह अपनी चलना दामन बचा बचा के
जो नोट दिख रहे थे कल तक नए चलन में
रक्खे तिजौरियों में अब सब छुपा छुपा के
घेरे हुई थी थाना जो न्याय माँगने को
उस भीड़ को पुलिस ने मारा भगा भगा के
जो सिर्फ चापलूसी के दम पे जी रहे थे
रोगी हुए कमर के उसको झुका झुका के
मंचों पे बैठ के तो उपवास करते रहते
खाते हैं पर गुलगुले नजरें बचा बचा के
ऐलान कर रहे हैं फिर से धमाल करने
पत्ता बनारसी अब मुँह में चबा चबा के
मंचों के सामने जो ये भीड़ दिख रही है
एकत्र की गई है बंदर नचा नचा के
सींवन कहीं उधड़ती या चैन टूटती है
भरते हैं बैग में जब चीजें दबा दबा के
बचता है वक्त अपना बचती है शक्ति अपनी
जब 'भारद्वाज ' रखते हैं घर जमा जमा के
चंद्रभान भारद्वाज
कर दी खड़ी कँटीली बागड़ उगा उगा के
अब राह अपनी चलना दामन बचा बचा के
जो नोट दिख रहे थे कल तक नए चलन में
रक्खे तिजौरियों में अब सब छुपा छुपा के
घेरे हुई थी थाना जो न्याय माँगने को
उस भीड़ को पुलिस ने मारा भगा भगा के
जो सिर्फ चापलूसी के दम पे जी रहे थे
रोगी हुए कमर के उसको झुका झुका के
मंचों पे बैठ के तो उपवास करते रहते
खाते हैं पर गुलगुले नजरें बचा बचा के
ऐलान कर रहे हैं फिर से धमाल करने
पत्ता बनारसी अब मुँह में चबा चबा के
मंचों के सामने जो ये भीड़ दिख रही है
एकत्र की गई है बंदर नचा नचा के
सींवन कहीं उधड़ती या चैन टूटती है
भरते हैं बैग में जब चीजें दबा दबा के
बचता है वक्त अपना बचती है शक्ति अपनी
जब 'भारद्वाज ' रखते हैं घर जमा जमा के
चंद्रभान भारद्वाज
Saturday, March 23, 2019
नाज है तो है
हमारे प्यार पर हमको अगर कुछ नाज है तो है
हमारी भी निगाहों में कहीं मुमताज है तो है
दिया बनकर जले दिन-रात उसकी मूर्ति के आगे
ये अपने सूफियाना प्यार का अंदाज है तो है
जमाने के लिए राजा रहे हम अपनी मर्जी के
हमारे दिल पे पर इक नाजनी का राज है तो है
उमर इक खूबसूरत मोड़ पर दिल छोड़ आई थी
धड़कनों में उसी की गूँजती आवाज है तो है
हमारा प्यार उठती हाट का सौदा नहीं कोई
बँधे अनुबंध में दुनिया भले नाराज है तो है
खुली है ज़िंदगी अपनी कहीं पर्दा नहीं कोई
अँगूठी में जड़ा उसका दिया पुखराज है तो है
हमारे प्यार का आधार बालू का घरोंदा था
हमारी आँख में वह आज तक भी ताज है तो है
फुदकती ही रही हरदम हमारे प्यार की बुलबुल
जमाने का हरिक सैय्याद तीरंदाज है तो है
अभी तक पढ़ रहे हैं बस रदीफ़ों काफियों को हम
ग़ज़ल में पर हमारा नाम 'भरद्वाज़ है तो है
चंद्रभान भारद्वाज
Wednesday, March 20, 2019
सफर अपना सुहाना हो गया
वक्र ग्रह सीधे हुए विनयी ज़माना हो गया
उसके मिलने से सफर अपना सुहाना हो गया
चाँद सूरज और तारे संग अपने हो गए
जबसे अपने संग उसका आना जाना हो गया
जब अचानक हो गई उसकी नजर मेरी तरफ
तब से मैं दुनिया की नज़रों का निशाना हो गया
जन्म से थे यार हम तो आदी तपती धूप के
अपने सिर पर हाथ उसका शामियाना हो गया
शब्द-चित्रों में सँजोए उसकी यादों के प्रहर
लगता अपने नाम कारूँ का खजाना हो गया
भर उड़ानें पार कर दीं हमने जलती सरहदें
अपने ऊँचे हौसलों का आजमाना हो गया
तेज गति से वक्त 'भारद्वाज ' सरपट भग रहा
अपना पोता अपने से ज्यादा सयाना हो गया
चंद्रभान भारद्वाज
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