कुछ सुबह और कुछ शाम में फँस गये
हर सड़क पर लगे जाम में फँस गये
कर के अपराध कुछ लोग चलते बने
कुछ किए बिन ही इल्ज़ाम में फँस गये
रीढ़ की चोट खा कर के बैठे हैं अब
संगमरमर के हम्माम में फँस गये
प्यार का यार आगाज़ तो था भला
पर कसकते से अंजाम में फँस गये
उसकी सूरत थी कुछ और सीरत थी कुछ
इक अजनबी के बस नाम में फँस गये
एक के मोल में दूसरा मुफ़्त था
अब लगा जैसे कम दाम में फँस गये
काम घर का न कोई भी निपटा सके
ऐसे दफ़्तर के इक काम में फँस गये
दर्शनों को गये जब अमरनाथ के
घर से चल कर पहलगाम में फँस गये
एक भगदड़ 'भरद्वाज' चारों तरफ
शांति के शब्द कोहराम में फँस गये
चंद्रभान भारद्वाज
हर सड़क पर लगे जाम में फँस गये
कर के अपराध कुछ लोग चलते बने
कुछ किए बिन ही इल्ज़ाम में फँस गये
रीढ़ की चोट खा कर के बैठे हैं अब
संगमरमर के हम्माम में फँस गये
प्यार का यार आगाज़ तो था भला
पर कसकते से अंजाम में फँस गये
उसकी सूरत थी कुछ और सीरत थी कुछ
इक अजनबी के बस नाम में फँस गये
एक के मोल में दूसरा मुफ़्त था
अब लगा जैसे कम दाम में फँस गये
काम घर का न कोई भी निपटा सके
ऐसे दफ़्तर के इक काम में फँस गये
दर्शनों को गये जब अमरनाथ के
घर से चल कर पहलगाम में फँस गये
एक भगदड़ 'भरद्वाज' चारों तरफ
शांति के शब्द कोहराम में फँस गये
चंद्रभान भारद्वाज