Saturday, January 31, 2009

तनिक हिस्सा बना लेते

हृदय की राजधानी का तनिक हिस्सा बना लेते;
हमें अपनी कहानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

हवायें रुख बदल लेतीं ज़माना साथ हो लेता,
नज़र की मेहरबानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

उतरती आस की तितली चमकते प्यार के जुगनू,
अगर खिलती जवानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

गमों का बोझ कंधों पर बहुत आसान हो जाता,
कभी टूटी कमानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

कहीं तसवीर बनबाते कहीं इक नाम गुदवाते,
प्रणय की इक निशानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

जहाँ से भी गुजर जाते हवा में फैलती खुशबू,
बदन की रातरानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

बदल कर धार 'भारद्वाज' आवारा नही होते,
अगर चंचल रवानी का तनिक हिस्सा बना लेते।

चंद॒भान भारद्वाज

8 comments:

सतपाल said...

जहाँ से भी गुजर जाते हवा में फैलती खुशबू,
बदन की रातरानी का तनिक हिस्सा बना लेते।
lajwab..wah! wah!

"अर्श" said...
This comment has been removed by the author.
"अर्श" said...

खड़े हो तुम अकेले क्यूँ तपती धुप में यूँ हीं
हमें भी बैमानी का तनिक हिस्सा बना लेते ..

आपकी ग़ज़ल पढ़कर मज़ा आ गया साहब ,ढेरो बधाई कुबूल फरमाएं

अर्श

Mired Mirage said...

सुन्दर!
घुघूती बासूती

श्रद्धा जैन said...

wah aapki gazal padh kar bahut sakun milta hai

गौतम राजरिशी said...

लाजवाब है चंद्रभान जी....एकदम नये रदीफ़ के साथ
खूब बँधा है
वाह-वाह

"अर्श" said...

भरद्वाज जी नमस्कार,
आप तो श्रेष्ठ है उत्तम है ... आपकी ग़ज़लों का तो मैं मुरीद हूँ ,हमेश पड़ता रहता हूँ और सीखता भी रहता हूँ... कुछ गज़ले तो आपकी काफी वजनी है बहोत ही मज़ा आया आपको पढ़के ... मैं तो आपसे बहोत छोटा हूँ .. आप मुझे सिर्फ़ अर्श ही कहे तो बेहतर होगा .. आप मेरे ब्लॉग पे आए ये बड़ी बात है मेरे लिए आपका हमेशा ही स्वागत है मेरे ब्लॉग और उम्मीद करता हूँ आपका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेगा मुझे ....

आपका
अर्श

MUFLIS said...

"hawaaeiN rukh badal leteeN,
zmaana sath ho leta ,
nazar ki meharbeeni ka
tanik hissa bnaa lete..."

waah ! aafreeen !
hr sher ek se badh kr ek...
ek murasaa aur tarahdaar gazal
kehne pr dheroN mubarakbaad...!!
---MUFLIS---