Thursday, January 29, 2009

रंग कब भरने दिया

कल्पनाओं में सुनहरा रंग कब भरने दिया;
कामनाओं को यहाँ उन्मुक्त कब उड़ने दिया।

चाहते थे ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी ही छीन ली,
मौत चाही तो सहज सी मौत कब मरने दिया।

खूबियों के साथ में कुछ खामियाँ भी बाँध दीं,
खामियों को खूबियों से दूर कब करने दिया।

पार कर मझधार कश्ती तो किनारे लग गई,
पर किनारों ने कहीं भी पाँव कब धरने दिया।

गर्द ने धुँधला दिया जो चित्र बीते वक्त का,
पुत गई दीवार तो वह चित्र कब टँगने दिया।

आँसुओं का कर्ज ही केवल वसीयत में मिला,
किश्त तो भरते रहे पर मूल कब घटने दिया।

घेर 'भारद्वाज' बैठा हर दिशा हर रास्ता,
कोहरे ने सूर्य का रथचक्र कब बढ़ने दिया।

चंद॒भान भारद्वाज

6 comments:

श्रद्धा जैन said...

आँसुओं का कर्ज ही केवल वसीयत में मिला,
किश्त तो भरते रहे पर मूल कब घटने दिया।

aapki gazal ki tarif karna jaise suraz ko diya dikhane jaisa hai

aapko padh kar bahut achha laga

Udan Tashtari said...

आँसुओं का कर्ज ही केवल वसीयत में मिला,
किश्त तो भरते रहे पर मूल कब घटने दिया।


-बहुत उम्दा रचना. बधाई.

Manish Kumar said...

वाह भारद्वाज साहब क्या बात है कितनी खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है आपने. हर शेर दमदार और प्रवाह जोरदार..

अल्पना वर्मा said...

गर्द ने धुँधला दिया जो चित्र बीते वक्त का,
पुत गई दीवार तो वह चित्र कब टँगने दिया।

sher bahut achcha lga.
aap ki gazal bahut achchee hai.

Aadrniy Sir,
aap ne bahar ke bare mein kaha....

main matraon ke hisaab se gazal likhti hun--bahar mein kaise adjust kartey hain ,wah sikhna hai.
aap ne gazal dekhi...khaami batayi---dhnywaad-

with regards

गौतम राजरिशी said...

क्या खूब सर "आँसुओं का कर्ज ही केवल वसीयत में मिला/किश्त तो भरते रहे पर मूल कब घटने दिया" वाह...
और ये वर्ड वेरिफिकेशन तो हटा दिजिये चंद्रभान जी,कोई फायदा नहीं होता इससे,उल्टा टिप्पणी करने वालों को हतोत्साहित ही करता है
किंतु मक्ता में कुछ उलझन सा लगा..

chandrabhan bhardwaj said...

Shraddha Jain,Sameer Lal, Manish Kumar,Alpana Verma,Gautam Rajrishi
sabhi ki tippadiyon ke liye aabhaari hoon.
Bhai Rajrishi ji ne word verification hatane ke liye sujhav diya hai wah hata diya hai.Makta men ho sakata hai 'Rathchakra'ke upyog se kuchh uljhan hui ho kyonki yah jyada prachlit shabd nahin hai, par 'pahiye' ke liye aur doosara upyukta shabd soojha hi nahin, atah isi ka upyog kiya hai.